ओणम त्यौहार कहानी एवं पूजा विधि 2020 (Onam Festival In Kerala History, Date In Hindi)

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Onam/ओणम:

ओणम एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार फसलों की कटाई से संबंधित है। शहर में इस त्योहार को सभी समुदाय के लोग हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। ओणम मलयालम कैलेंडर के पहले माह ‘चिंगम’ के प्रारंभ में मनाया जाता है। यह पर्व चार से दस दिनों तक चलता है जिसमें पहला और दसवाँ दिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। ओणम केरल का एक प्रमुख ओर एक राष्ट्रीय पर्व भी है।

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ओणम एक मलयाली त्यौहार है, जो किसानों का फेस्टिवल है, लेकिन सभी लोग ही वहां इसे मनाते है। जिसमें केरल राज्य में लोकल हॉलिडे भी होता है। यहाँ इस दौरान 4 दिन की छुट्टी रहती है। इस त्यौहार की प्रसिद्धता को देखते हुए, 1961 में इसे केरल का नेशनल फेस्टिवल घोषित कर दिया गया।

ओणम का त्यौहार समस्त केरल में 10 दिनों तक मनाया जाता है। भारत सरकार इस रंगबिरंगे त्यौहार को अन्तराष्ट्रीय तौर पर बढ़ावा दे रही है, जिससे ओणम त्यौहार के समय अधिक से अधिक पर्यटक केरल आ सकें। इसका असर देखा भी जा सकता है, भगवान् का देश कहा जाने केरल को देखने के लिए, ओणम के दौरान सबसे अधिक लोग जाते है।

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ओणम का उत्सव अगस्त या सितम्बर में राजा महाबली के स्वागत में प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है जो दस दिनों तक चलता है। उत्सव त्रिक्काकरा (कोच्ची के पास)  केरल के एक मात्र वामन मंदिर से प्रारंभ होता है। ओणम में प्रत्येक  घर के आँगन में फूलों की पंखुड़ियों से सुन्दर सुन्दर रंगोलिया (पूकलम) डाली जाती हैं।

युवतियां  उन रंगोलियों के चारों तरफ वृत्त बनाकर उल्लास पूर्वक नृत्य (तिरुवाथिरा कलि) करती हैं। इस पूकलम का प्रारंभिक स्वरुप पहले (अथम के दिन) तो छोटा होता है परन्तु हर रोज इसमें एक और वृत्त फूलों का बढ़ा दिया जाता है। इस तरह बढ़ते बढ़ते दसवें दिन (तिरुवोनम)  यह पूकलम वृहत आकार धारण कर लेता है।

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इस पूकलम के बीच त्रिक्काकरप्पन (वामन अवतार में विष्णु), राजा महाबली तथा उसके अंग  रक्षकों की प्रतिष्ठा होती है जो कच्ची मिटटी से बनायीं जाती है। ओणम मैं नोका दौड जैसे खेलों का आयोजन भी होता है। ओणम एक सम्पूर्णता से भरा हुआ त्योहार है जो सभी के घरों को ख़ुशहाली से भर देता है।

ओणम पर्व क्यों है खास:

इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं और अलग-अलग तरह के भोजन बनाते हैं। राजा बलि को यह सब अर्पित किया जाता है। ओणम को केवल राजा बलि के आने की खुशी में ही नहीं बल्कि नई फसल आने की खुशी में भी मनाया जाता है। इस दिन हर घर के सामने रंगोली बनाई जाती है।

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ओणम त्यौहार का महत्व और क्यों मनाया जाता है? (Significance of Onam festival in Kerala):

ओणम एक प्राचीन त्योहार है, जो अभी भी आधुनिक समय में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ओणम के साथ साथ चिंगम महीने में केरल में चावल की फसल का त्योहार और वर्षा के फूल का त्योहार मनाया जाता है।

ओणम त्यौहार की कहानी असुर राजा महाबली एवं भगवान् विष्णु से जुड़ी हुई है।  लोगों का मानना है कि ओणम त्यौहार के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने, उनके हाल चाल, खुशहाली जानने के लिए हर साल केरल राज्य में आते है. राजा महाबली के सम्मान में यह त्यौहार यहाँ मनाया जाता है

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ओणम के बारे मे पौराणिक मान्यता:

ओणम को मनाने के पीछे एक पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि केरल में महाबली नाम का एक असुर राजा था। उसके आदर सत्कार में ही ओणम त्योहार मनाया जाता है।  ओणम पर्व का खेती और किसानों से गहरा संबंध है। किसान अपने फसलों की सुरक्षा और अच्छी उपज के लिए श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना करते हैं।

फसल पकने की खुशी लोगों के मन में एक नई उम्मीद और विश्वास जगाती है। इन दिनों पूरे घर की विशेष साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद लोग पूरे घर को फूलों से सजाते हैं। घरों को फूलों से सजाने का कार्यक्रम पूरे 10 दिनों तक चलता है। लोग अपने दरवाजों पर फूलों से रंगोली भी बनाते हैं।

ओणम उत्सव के दौरान एक पारंपरिक दावत समारोह का आयोजन किया जाता है।  इस समारोह में मीठे व्यंजनों के अलावा नौ स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं जिनमें पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर, केले और पापड़ के चिप्स  मुख्य रूप से बनाए जाते हैं।

इन व्यंजनों को केले के पत्तों पर परोसा जाता है। लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार वालों को इस पर्व की शुभकामनाएं देते हैं।

ओणम भारत के सबसे रंगारंग त्योहारों में से एक है। इस पर्व की लोकप्रियता इतनी है कि केरल सरकार इसे पर्यटक त्योहार के रूप में मनाती है। ओणम पर्व के दौरान नाव रेस, नृत्य, संगीत, महाभोज जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।

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ओणम त्यौहार कहानी एवं पूजा विधि 2020 (Onam Festival In Kerala History, Date)

भारत में तरह तरह के धर्म के लोग रहते है, ये हम सभी जानते है। यहाँ सभी धर्मों के अपने अपने त्यौहार है, कुछ त्यौहार तो देश के हर कोने में मनाते है, तो कुछ किसी विशेष क्षेत्र या राज्य में मनाये जाते है। भारत के मुख्य त्योहारों की बात करे, तो दीवाली, होली, ईद, बैसाखी, क्रिसमस, दुर्गा पूजा आदि है।

दीवाली की बात की जाये तो ये देश का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है, मुख्यरूप से उत्तरी भारत का तो ये बहुत बड़ा त्यौहार है, इसी तरह कलकत्ता में दुर्गा पूजा, पंजाब में बैसाखी मुख्य है।

किसी राज्य विशेष के त्योहारों की बात करें, तो दक्षिण भारत के केरल में ओणम त्यौहार उत्तरी भारत के दीवाली जितना ही महत्वपूर्ण है। ओणम को मुख्य रूप से केरल राज्य में मनाया जाता है, जहाँ इसे बड़ी ही धूमधाम से हिन्दू धर्म के द्वारा मनाया जाता है।

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कब मनाया जाता है ओणम पर्व? (Onam Festival 2020 Date):

ओणम का त्यौहार मलयालम सोलर कैलेंडर के अनुसार चिंगम महीने में मनाया जाता है। यह मलयालम कैलेंडर का पहला महिना होता है, जो ज्यादातर अगस्त-सितम्बर महीने के समय में ही आता है।

दुसरे सोलर कैलेंडर के अनुसार इसे महीने को सिम्हा महिना भी कहते है, जबकि तमिल कैलेंडर के अनुसार इसे अवनी माह कहा जाता है। जब थिरुवोनम नक्षत्र चिंगम महीने में आता है, उस दिन ओणम का त्यौहार मनाया जाता है।  थिरुवोनम नक्षत्र को हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रवना कहते है।

ओणम का महूर्त:

इस बार सन 2020 में ओणम 22 अगस्त से शुरू होकर 2 सितम्बर तक चलेगा। ओणम त्यौहार में थिरुवोनम दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है, जो 2 सितम्बर को है।

थिरुवोनम नक्षत्र तिथि शुरू      सुबह 06:48,

थिरुवोनम नक्षत्र तिथि ख़त्म     सुबह 09:49

ओणम त्यौहार के 10 दिन (Onam Ten Days):

क्रमांक  दिन    महत्व

  1. अथं पहला दिन होता है, जब राजा महाबली पाताल से केरल जाने की तैयारी करते है।
  2. चिथिरा फूलों का कालीन जिसे पूक्क्लम कहते है, बनाना शुरू करते है।
  3. चोधी पूक्क्लम में 4-5 तरह के फूलों से अगली लेयर बनाते है।
  4. विशाकम इस दिन से तरह तरह की प्रतियोगितायें शुरू हो जाती है।
  5. अनिज्हम नाव की रेस की तैयारी होती है।
  6. थ्रिकेता छुट्टियाँ शुरू हो जाती है।
  7. मूलम मंदिरों में स्पेशल पूजा शुरू हो जाती है।
  8. पूरादम महाबली और वामन की प्रतिमा घर में स्थापित की जाती है।
  9. उठ्रादोम इस दिन महाबली केरल में प्रवेश करते है।
  10. थिरुवोनम मुख्य त्यौहार।
Bringing in Onam with the Security of Good Health
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ओणम पर्व से जुड़ी कथा (Onam Festival Story in hindi):

महाबली, पहलाद के पोते थे। पहलाद जो असुर हिरनकश्यप के बेटे थे, लेकिन फिर भी वे विष्णु के भक्त थे। अपने दादा की तरह महाबली भी बचपन से ही विष्णु भक्त थे। समय के साथ महाबली बड़े होते गए और उनका साम्राज्य विशाल होते चला गया। वे एक बहुत अच्छे, पराक्रमी, न्यायप्रिय, दानी, प्रजा का भला सोचने वाले रजा थे।

महाबली असुर होने के बाद भी धरती एवं स्वर्ग पर राज्य किया करते थे। धरती पर उनकी प्रजा उनसे अत्याधिक प्रसन्न रहती थी, वे अपने राजा को भगवान् के बराबर दर्जा दिया करते थे। इसके साथ ही महाबली में घमंड भी कहीं न कहीं आने लगा था। ब्रह्मांड में बढ़ती असुरी शक्ति को देख बाकि देवी देवता घबरा गए, उन्होंने इसके लिए विष्णु जी की मदद मांगी। विष्णु जी इसके लिए मान जाते है।

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केरल के प्रसिद्ध त्योहार ‘ओणम’ के माध्यम से नई संस्कृति को जानने का मौका मिलता है। इस अवसर पर महिलाओं द्वारा आकर्षक ‘ओणमपुक्कलम’ (फूलों की रंगोली) बनाई जाती है। और केरल की प्रसिद्ध ‘आडाप्रधावन’ (खीर) का वितरण किया जाता है।

ओणम के उपलक्ष्य में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इन प्रतियोगिताओं में लोकनृत्य, शेरनृत्य, कुचीपु़ड़ी, ओडि़सी, कथक नृत्य प्रतियोगिताएँ प्रमुख हैं।

पुराणों में ओणम: ओणम त्योहार सम्राट महाबली से जु़ड़ा है। यह पर्व उनके सम्मान में मनाया जाता है। लोगों का विश्वास है कि भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार ‘वामन’ ने चिंगम मास के इस दिन सम्राट महाबली के राज्य में प्रकट होकर उन्हें पाताललोक भेजा था।

इतिहास की नजर में: माना जाता है कि ओणम पर्व का प्रारंभ संगम काल के दौरान हुआ था। उत्सव से संबंधित अभिलेख कुलसेकरा पेरुमल (800 ईस्वी) के समय से मिलते हैं। उस समय ओणम पर्व पूरे माह चलता था।

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