Happy krishna janmashtami, shri krishan ka janm katha, जन्माष्टमी कृष्ण जन्म की कथा

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जन्माष्टमी व्रतांत:

यहाँ आपको हम भगवान कृष्ण जन्म कथा के बारे मे बताते है। कैसे बाल कृष्ण के पृथ्वी पर जन्म लिया और दुनिया में असुरों का नाश किया साथ ही अपने लीलाओं से लोगों का मन मोह लिया।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्या है?  

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं, क्योंकि यह दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस माना जाता है। इसी तिथि की घनघोर अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। यह तिथि उसी शुभ घड़ी की याद दिलाती है और सारे देश में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

Krishna-Janmashtami-Katha-in-Hindi
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कंस के पिता राजा उग्रसेन के बारे में:

‘द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज करता था। राज्य का वातावरण धर्म के अनुकूल पौराणिक कथाओं के अनुसार कंस मथुरा के राजा उग्रसेन और रानी पद्मावती का पात्र था। मथुरा नरेश उग्रसेन स्वभाव से अत्यंत धार्मिक थे।

अनेक साधु-संत उनके आश्रय में शांति से अध्ययन, मनन, चिंतन किया करते थे। सभी धार्मिक कार्यों यज्ञ, हवन आदि की व्यवस्था करने, साधुजनों के हित के लिए कार्य करने और उन पर अत्याचार करने वाले को दंडित करने के लिए राजा उग्रसेन हमेशा उपलब्ध रहते थे। उनके राज्य का वातावरण हर तरह से धर्म के अनुकूल था।

raja ugrasen, raja agrasen
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राजा उग्रसेन का विवाह विदर्भ के राजा सत्यकेतु की पुत्री पद्मावती के साथ हुआ था। दोनों में बहुत प्रेम था और वे धर्मानुकूल आचरण करते हुए सुखी गृहस्थ जीवन व्यतीत कर रहे थे।

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रानी पद्मावती के जीवन के बारे में:

रानी पद्मावती के बारे में कहा जाता है कि रानी पद्मावती अत्यंत सुंदर, चंचल और मनमोहक थीं। एक बार वे अपने मायके गई हुई थीं। मायके में वह अपनी सखियों के साथ उद्यान में खेल रही थीं, तभी एक गंधर्व की दृष्टि उन पर पड़ी। पुराणों में इस गंधर्व का नाम द्रमिला या गोदिला बताया गया है।

रानी पद्मावती को देखते ही गंधर्व उन पर आसक्त हो कर उन्हें पाने के लिए संकल्पित हो गया। पौराणिक कथाओं में गंधर्वों को कुछ अनुपम शक्तियों से युक्त बताया गया है।

अपने मायावी प्रभाव से गंधर्व ने रानी पद्मावती को सम्मोहित कर लिया। इस तरह संसार से गोपनीय रहते हुए द्रमिला और रानी पद्मावती का संबंध स्थापित हुआ और इसी के फलस्वरूप रानी पद्मावती गर्भवती हुईं।

रानी पद्मावती गर्भवती हुईं।
रानी पद्मावती गर्भवती हुईं।

सम्मोहन की अवस्था में होने से उन्हें स्वयं भी कुछ याद नहीं रहा और वे मथुरा जाकर अपने पति राजा उग्रसेन के साथ सामान्य जीवन व्यतीत करने लगीं।

कुछ लेखों और अखबारों के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार कहा जाता है की पुत्र कंस का जन्म समय आने पर उनके पुत्र कंस का जन्म हुआ, जो संसार की दृष्टि में तो राजा उग्रसेन का पुत्र था, पर असल में उसका पिता द्रमिला था। द्रमिला हर तरह से एक दुष्ट, पापी और निकृष्ठ गंधर्व था। अपने पिता के दुर्गुणों के अनुकूल ही अति धार्मिक वातावरण में रहने के बावजूद कंस हर तरह की दुष्ट वृत्तियों का स्वामी बना।

श्रीकृष्ण की जन्म कथा:

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्म संबंधी कथा भी सुनते-सुनाते हैं, जो इस प्रकार है-

उसके आततायी पुत्र कंस ने उसे गद्दी से उतार दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से हुआ था।

vasudev aur devki ka vivah
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इसलिए यह कथा कृष्ण जन्माष्टमी राजा कंस के युग से संबंधित है।  जब कंस मथुरा का राजा था।

वह अपनी बहन की शादी में दिल से शामिल हुआ और आनंद लिया। एक बार जब वह अपनी बहन के ससुराल घर जा रहा था। तभी उसे आकाश में छिपी आवाज़ से चेतावनी मिली कि “कंस, जिस बहन को तुम बहुत प्यार कर रहे हो वह एक दिन तुम्हारी मृत्यु का कारण बनेगी देवकी और वासुदेव का आठवां बच्चा तुझे मार डालेगा। यदि देवकी के विवाह के समय आकाशवाणी ना हुई होती, तो वह कभी अपनी बहन पर मर्मांतक अत्याचार नहीं कर सकता था।

kans ke liye maut ki bhavishyawani
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यह सुंदते ही कंश ने देवकी व उसके पति को मारने का आदेश दिया । तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- ‘मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी। बहनोई को मारने से क्या लाभ है?’

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कंस ने देवकी की बात मान ली और मथुरा वापस चला आया। इसलिए उसने अपने सैनिकों को अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को कारागार में रखने के लिए आदेश दिया। उसने  मथुरा के सभी लोगों के साथ क्रूरता से बर्ताव करना शुरू कर दिया।

देवकी-वासुदेव-उग्रसेन-कंस
देवकी-वासुदेव-उग्रसेन-कंस

लोगों वसुदेव-देवकी के दुखी जीवन को देख आठवें बच्चे की रक्षा का उपाय रचा। जिस समय वसुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो और कुछ नहीं सिर्फ ‘माया’ थी।

वसुदेव-देवकी के एक-एक करके सात बच्चे हुए और सातों को जन्म लेते ही कंस ने मार डाला।

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अब आठवां बच्चा होने वाला था। कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए। उसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था।

janm se purv shri krishna
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जिस कोठरी में देवकी-वसुदेव कैद थे, उसमें अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान प्रकट हुए। दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े।

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तब भगवान ने उनसे कहा- ‘अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं।

krishna janm -Shankh Chakr Gada Padm
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यह सुन कर महाराज वासुदेव नन्द को ले कर काल कोठरी से निकलते हैं भगवान ने कहा उसी समय अपने मित्र नंदजी के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है, उसे लाकर कंस के हवाले कर दो। इस समय वातावरण अनुकूल नहीं है।

कृष्ण
कृष्ण

फिर भी तुम चिंता न करो। जागते हुए पहरेदार सो जाएंगे, कारागृह के फाटक अपने आप खुल जाएंगे और उफनती अथाह यमुना तुमको पार जाने का मार्ग दे देगी।’

उसी समय वसुदेव नवजात शिशु-रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और अथाह यमुना को पार कर नंदजी के घर पहुंचे।

शेषनाग
शेषनाग

उन्होंने एक बरसात की रात को पार किया जहां शेषनाग ने उन्हें मदद की। उन्होंने अपने बेटे को अपने दोस्त (यशोदा और नंद बाबा) की लड़की के साथ बदला और कंस की जेल वापस लौट आये।

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सभी दरवाजे बंद हो गए और कंस को संदेश भेज दिया गया कि देवकी ने एक लड़की को जन्म दिया था।

अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी को बच्चा पैदा हुआ है।

उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- ‘अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारनेवाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है। वह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा।’ यह है कृष्ण जन्म की कथा।

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कंस आया और उस लड़की को पटक कर मारने की कोशिश की, उसी समय वह लड़की कंस के हांथों से अदृश्य हो कर आकाश में अपने असली रूप बिजली कन्या के रूप में प्रकट हुई और उसने चेतावनी दी और कहा – अरे मुर्ख कंस तुम्हारा हत्यारा तो बहुत सुरक्षित जगह पर बढ़ रहा है और जब भी तुम्हारा समय पूरा हो जाएगा, तब वो तुम्हारा वध कर देगा।

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हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार थे। यशोदा और नंद के सुरक्षित हाथ में गोकुल में बाल कृष्ण धीरे-धीरे  बढ़ रहे थे।

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बाद में उन्होंने कंस की सभी क्रूरता को समाप्त कर दिया और कंस की जेल से अपने माता-पिता को मुक्त कर दिया।

कसं वध
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कृष्ण की विभिन्न शरारती लीलाओं से गोकुलवासी बहुत खुश थे। गोकुल में रहने वाले लोग इस त्योहार को गोकुलाष्टमी के रूप में मनाते हैं।

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