Raksha Bandhan 2020 Date &Time :- कब है रक्षाबंधन पर्व,धार्मिक महत्व, तारीख, मुहूर्त और विधि

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Raksha Bandhan 2020 Date & Time:- कब है?रक्षाबंधन पर्व,धार्मिक महत्व, तारीख, मुहूर्त और विधि

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रक्षाबंधन पर्व का धार्मिक महत्व

अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है। श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है।

इस पर्व को मनाने के पिछे कहानियां हैं। यदि इसकी शुरुआत के बारे में देखें तो यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति के किया गया रक्षा बंधन है।

भविष्य पुराण के अनुसार जो कथा मिलती है वह इस प्रकार है।बहुत समय पहले की बाद है देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ा हुआ था लगातार १२ साल तक युद्ध चलता रहा और अंतत: असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवराज इंद्र के सिंहासन सहित तीनों लोकों पर विजय हासिल कर ली थी। इसके बाद इंद्र देवताओं के गुरु, ग्रह बृहस्पति के पास के गये और सलाह ली। बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को कहा। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरू बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया।

इस रक्षा विधान के दौरान मंत्रोच्चारण से रक्षा पोटली को मजबूत किया गया। पूजा के बाद इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है  इस रक्षा पोटली के देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा। इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने और अपना खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए।

यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक और जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी और बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में बहुत ताकत होती है। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और भी गहरा करने के लिये पर्व को मानते है|

रक्षाबंधन मुहूर्त 3 अगस्त 2020

  • रक्षाबंधन 3 अगस्त 2020 का मुहूर्त
  • राखी बांधने का मुहूर्त : 09:28:30 से 21:14:21 
  • अवधि : 11 घंटे 43 मिनट
  • रक्षाबंधन अपराह्न मुहूर्त : 13:46:16 से 16:26:16
  • रक्षाबंधन प्रदोष मुहूर्त : 19:06:15 से 21:14:21

इस विधि से भाई की कलाई में बांधें राखी

रक्षाबंधन के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान करें और शुद्ध कपड़े पहनें। इसके बाद घर को साफ करें और चावल के आटे का चौक पूरकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें। चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एक साथ मिलाएं। पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाएं। थाली में मिठाई रखें। इसके बाद भाई को पीढ़ा  पर बिठाएं। अगर पीढ़ा आम की लकड़ी का बना हो तो बहुत शुभ होता है

रक्षा सूत्र बांधते समय भाई को पूर्व दिशा की ओर बिठाएं। वहीं भाई को तिलक लगाते समय बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। इसके बाद भाई के माथे पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर राखी बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें फिर उसको मिठाई खिलाएं। अगर बहन बड़ी हो तो छोटे भाई को आशीर्वाद दें और छोटी हो तो बड़े भाई को प्रणाम करें। फिर हैप्पी रक्षाबंधन भी बोल दे |

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